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अब खुला 16 जनवरी को हुई हत्या का राज


आगरा : आज ताजनगरी मे तमाम रहस्यों को खुद में समेटे 1935, 16 जनवरी की वो काली रात और उन रहस्यों को उस रात की खामोशी चीख-चीख कर धोखा, लालच, क्रोध की एक अनसुलझी कहानी बया कर रही थी। जहां न सिर्फ एक व्यवसायी का बल्कि प्रेम, समर्पण और त्याग का भी कत्ल हुआ था। रात के अंधेरे का अपराध जब कोर्ट रूम पहुंचा तो एक के बाद एक रहस्यों के महीन धागे सुलझने लगे। और फिर थी फैसले की घड़ी। जिसे मंडलायुक्त प्रदीप भटनागर ने सामाजिक पहलुओं और कानूनी दाव पेंचों की बारीकियां बताते हुए तथ्यों के साथ सुनाया।
      रहस्यों से भरी मर्डर मिस्ट्री स्टोरी 16 जनवरी की रात का मंचन जब सूरसदन में किया गया तो कुछ ऐसा ही नजारा था। ताज महोत्सव के तहत आगरा बुक क्लब 1935 में आइन रैंड लेखक की रचना मानों सूरसदन प्रेक्षागृह में एक बार फिर जीवन्त हो गई। अमेरिका का कोर्ट रूम ड्रामा 40 के दशक में त्रिकोणीय प्रेमकथा, महत्वाकांक्षी व्यक्तित्व, धोखा, सस्पेंस और समर्पण के जरिए उस जमाने की सोच, विचारों को आज के समय में भी परिभाषित करता नजर आया। 
         खास बात थी कि इस मर्डर मिस्ट्री नाटक का मंचन प्रोफेशनल कलाकारों के बजाय एबीसी के सदस्यों ने अपनी कड़ी मेहनत से बखूबी अंजाम दिया। जिसे सूत्रधार में पिरोया एबीसी की संस्थापिका डॉ. शिवानी चतुर्वेदी ने। सवा घंटे के नाटकीय मंचन में जहां कभी दर्शकों की आंखों में आंसू झलके तो कभी होठों पर प्रेम की मुस्कान। कभी दिल में पैदा भय चेहेर का रंग उड़ा ले गया तो कभी धोखे और फरेब ने लोगों को हृदय को दृवित कर दिया। भावनाओं के इस उतार चढ़ाव में फैसले की घड़ी कब आयी दर्शकों को एहसास भी न हुआ। नाटक की निर्देशिका थीं श्वेता बंसल। संचालन अपर्णा पोद्दार व धन्यवाद ज्ञापन मेघना जैन ने दिया। मुख्य अतिथि मंडलायुक्त प्रदीप भटनागर जिन्होंने ज्यूरी की भूमिका निभाते हुए फैसला भी सुनाया। विशिष्ठ अतिथि एडीएवीसी मनीषा त्रिघाटिया। विशेष अतिथि जिलाधिकारी पंकज कुमार। ब्रिगेडियर विकास सैनी, डॉ. सीपी राय, नगर आयुक्त इंद्र विक्रम सिंह आदि थे।


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