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विनीत को महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री करेंगे सम्मानित, पत्रकारिता से उम्रक़ैद की सजा से 3 निर्दोषों को कराया था आजाद

* एक एक्सक्लूसिव न्यूज़ स्टोरी ने बनाया रातों-रात स्टार 
* टॉप 50 इंडियन आइकॉन अवार्ड के मंच पर मिलेगा सम्मान 
आगरा : एक एक्सक्लूसिव न्यूज़ स्टोरी ने विनीत दुबे को रातों-रात स्टार बना दिया । आज की भागती दौड़ती जिंदगी मे पत्रकारिता के मायने ही बदलते जा रहे हैं वही एक तरफ हम सोचते है कि काश दुनियां का हर शख्स विनीत दुबे जैसा हो जो दूसरों के सहयोग और मदद के लिए हमेशा तत्पर हो और काम के जरिये शहर का नाम ऊँचा करता हो । 29 जुलाई को मुम्बई मे होने वाले टॉप 50 इंडियन आइकॉन मे देश-विदेश की ऐसी 50 हस्तियों को सम्मानित किया जाएगा जिन्होंने अपने क्षेत्र मे देश प्रदेश व शहर का नाम रोशन किया। विनीत दुबे इस अवार्ड आयोजन मे आगरा पत्रकार जगत का प्रतिनिधत्व करते नजर आएंगे । जिनको पत्रकारिता क्षेत्र मे सराहनीय कार्यों के लिए टॉप 50 इंडियन आइकॉन मैं शामिल किया गया है ।

क्या थी एक्सक्लूसिव न्यूज़ स्टोरी
ये खबर एक ऐसे परिवार की थी । जिस परिवार के तीन सदस्य पिता, पुत्र और चाचा, आगरा सेंट्रल जेल मे 5 साल से उम्र कैद की सजा काट रहे थे, एक दिन किसी खबर विनीत दुबे सेंट्रल पहुंचे जहां उनकी मुलाक़ात उम्र कैद की सजा काट रहे मुकेश से हुई, मुकेश ने बताया कि वो मऊरानी पुर झांसी का रहने वाला है उसके पिता और चाचा और वो खुद एक ऐसे व्यक्ति की हत्या के जुर्म मे उम्र क़ैद की सजा काट रहे हैं जो आज भी जिन्दा है उसने बताया कि घर मे अब सिर्फ बूढ़ी माँ और बहिन है जो किसी तरह बकरियां चराकर अपना पेट पाल रहीं हैं पीड़ित कैदी मुकेश का दर्द सुनने के बाद विनीत ने उन्हें न्याय दिलाने की ठानी और मुकेश से गॉव का पता लेकर झाँसी मऊरानीपुर पहुँच गए । 
       करीब दो दिन की छानबीन के बाद उन्हें वो व्यक्ति मिल गया जिसकी हत्या के जुर्म मे ये तीनों जेल मे थे । अपनी जान को जोखिम मे डालकर चालाकी व होशियारी का परिचय देते हुए विनीत दुबे ने जीवित व्यक्ति को पहले अपनी बातों के जाल मे फसाया और फिर उसका इंटरव्यू लेते हुए वो सब उगलवा लिया जो इन तीन वेगुनाओं को न्याय दिलाने के लिए काफी था। झाँसी अधिकारीयों की बात संज्ञान मे  डालने के बाद वो बापिस आगरा आये और पूरी स्टोरी फ़ाइल की। नेशनल चैनल ने करीब एक घंटे इस खुलासे की खबर को प्रमुखता से दिखाया गया। जिसके बाद पूरा देश मे निर्दोष से साहनभूति दिखते हुए उम्रकैद से मुक्त करने के लिए हर बड़ा चैनल झाँसी और आगरा की जेल पहुंचा । इसी दौरान विनीत की खबर का संज्ञान लेते हुए सुप्रीम कोर्ट ने दोषी की गवाही लेते हुए सभी वेगुनाहों को जेल से रिहा करने के आदेश दिया। आगरा मण्डल के युवा पत्रकार विनीत दुबे आज भी सच्चाई की राह पर चलकर एक राष्ट्रीय चैनल अपनी ख़बरों से लोगों को इन्साफ दिलाने का कार्य कर रहे हैं ।

विनीत दुबे का परिचय
2 अक्टूवर 1976 को जन्मे विनीत दुबे जब वो 10 वर्ष के थे तो उनके पिता गॉव से परिवार सहित आगरा आ गए | जब वो 8 वीं क्लास मैं आये और देखा कि पिता पर उनकी और उनके भाई बहिन की पढाई सहित घर खर्च का बजन ज्यादा पड़ रहा है तो उन्होंने 14 साल की उम्र मैं काम करने की सोची। वो पढाई के साथ=साथ जॉब करने लगे । सुबह स्कूल जाते और फिर दिन के बाद देर रात तक काम करते ।

पत्रकारिता मे कब रखा कदम
1994 मे आगरा डायरी की शुरुआत हुई तो वो राहुल पालीवाल और राजीव दीक्षित के संपर्क मे आये और फिर लगातार वो 2003 तक उन्ही के साथ आगे बढ़ते रहे । इस दौरान उन्होंने आगरा केबिल नेटवर्क, इन टीवी, सिटी केबिल, इन आगरा डायरी , मून टीवी, आदि मे काम किया । फरवरी 2003 मैं उन्होंने राष्ट्रीय न्यूज़ चैनल सहारा टीवी कैमरामैन के पद पर ज्वाइन किया और 2009 तक वो कैमरामेन रहे। उनके अच्छे कार्य और मेहनत और तेज दिमाग व् उनकी सोच को देखते हुए दो माह की ट्रेनिंग के बाद उन्हें रिपोर्टर बना दिया और यंही से उन्होंने उचाईयों को छूना शुरू किया । पूर्व मे उत्तर प्रदेश के राज्यपाल राम नाईक भी कर चुके है सम्मानित और अब 29 जुलाई को मुम्बई मे महारराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडनवीस सम्मानित करेंगे|

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