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बेटियो को घर जैसा प्यार व दुलार मिल रहा


आगरा। पंचशील आश्रम में प्रताड़ना झेलने के बाद बच्चियों को रामलाल वृद्धाश्रम में बेहद प्यार और दुलार मिल रहा है। घर जैसा प्यार और दुलार मिलने से बच्चियां बेहद खुश है। बच्चियों को बुजुर्ग दादी-बाबा का लाड़ और बुजुर्गो से सीख मिलने से उनके मन से अनाथ होने का एक दुख निकल रहा है। रामलाल वृद्धाश्रम से बच्चियों को अब स्कूल भेजा जाने लगा है। करीब 18 बच्चियों का रामलाल वृद्धाश्रम की तरफ से प्राइवेट स्कूलों में दाखिला करा दिया गया है। बेटियों को घर जैसा अहसास हो इसके लिये बेटियों को घर जैसा ही टिफिन दिया जाता है। बेटियों के आने से रामलाल वृद्धाश्रम एक भरा पूरा परिवार की तरह गया है।
         रामलाल वृद्धाश्रम के अध्यक्ष शिवप्रसाद ने बताया कि बच्चियों को यहां पूरी देखरेख मिल रही है। बच्चियों के सुबह स्कूल के टिफिन से लेकर रात के खाने तक का विशेष ध्यान दिया जा रहा है। मानसिक चिकित्सालय के मानसिक चिकित्सा अधीक्षक डॉ.दिनेश सिंह राठौर ने बताया कि बच्चों का मानसिक का विकास जन्म से14 उम्र तक सबसे तेज गति में होता है। इस उम्र में यदि उनको सही वातावरण नही मिलता है तो उनमें समाज के प्रति द्वेष, नकारात्मकता एंव अकेलापन पनप जाता है|




रामलाल वृद्धाश्रम के काउंसलर एंव शिक्षक विमल कुमार ने बताया कि बच्चियों को स्कूल की पढ़ाई के बाद होम ट्यूशन मेरे द्वारा दिया जाता है। बच्चियों का पढ़ाई के प्रति बेहद लगाव है। सभी लड़कियां समय से स्कूल और ट्यूशन के लिये जाती है।

क्या कहा बच्चियों ने----
  • पहले आश्रम से ज्यादा यह वाला घर बहुत अच्छा लगता है। यहां पढ़ने के लिये जाने को मिलता है। जो सबसे ज्यादा अच्छा लगता है। -पूजा
  • यहां दादा-दादी के साथ बहुत अच्छा लगता है। हम सभी साथ में खाना खाते है,खेलते और पढ़ते है। -पिंकी
  • यहां बहुत अच्छा लगता है। रोज बढि़या बढ़िया खाना मिलता है और पढ़ने को भी जाने को मिलता है। -रूबी
  • दादा-दादी  हमें रोज कहानियां सुनाते है। सुबह स्कूल जाते है, शाम को ट्यूशन पढ़ते है। पूरा दिन बहुत मजे करते है। यहां सभी लोग बहुत अच्छे है। -प्रीति

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