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गाड़ी बंगला होते हुए भी वृद्धाश्रम पहुंचे माँ बाप... विडियो मे सुने उनकी दर्द भरी दास्तां उनकी ही जुबानी


पीड़ित माँ बाप 

आगरा : थाना न्यू आगरा के भगवान् तुल्य माँ बाप को बेटो ने आज इस कदर प्रताड़ित कर दिया है की शहर के मुख्य बाजारों में दो दूकान और पोर्श इलाके में  कोठी  होते हुए भी माँ बाप को अनाथ आश्रम में अपना बुढापा काटना पड़ रहा है| पिता का आरोप है की दोनों छोटे बेटे उन्हें जायदाद के लिए परेशान करते हैं और हथियार बंद बदमाशो के दम पर उन्हें भगा रहे हैं | वहीँ बेटो का कहना है की बड़े बेटे के चक्कर में पिता जी ज्यादतिया कर रहे हैं| कल तक जो व्यक्ति मन्दिरों और मोहल्ले में होने वाले भंडारों में चन्दा देता था और करोडो की सम्पत्ति होने का गर्व करता था आज उसी व्यक्ति को अपने और पत्नी के रहने के लिए अनाथ आश्रम की शरण लेनी पद रही थी और लोगो के द्वारा दान में दिया गया भोजन लाइन में लग कर लेना पद रहा था| बूढ़े माँ बाप अनाथ आश्रम में रहकर भगवान से प्रार्थना और इन्तजार के अलावा कुछ भी नही कर पा रहे हैं और हर समय उनकी आँखों में आंसुओ की बूंदे दिखाई दे रही हैं|


 क्या है मामला 
बता दे की सात अप्रैल को सिकंदरा स्थित राम लाल वृद्ध आश्रम में कमला नगर अलका कुञ्ज निवासी ओम प्रकाश ७८ अपनी पत्नी राज कुमारी के साथ कुछ लोगो के साथ राम लाल आश्रम पनाह मांगने आये थे| आश्रम की लिखा पढ़े में जब उनके बारे में पता चला तो सभी हैरान हो गये| ओमप्रकश करोडो की सम्पत्ति के मालिक हैं और उनकी रावत पाड़ा और दिल्ली गेट पर दूकान और कमला नगर में बड़ी कोठी है| उन्होने बताया की उनके तीन बेटे अनूप मित्तल ,मनोज मित्तल और सुबोध मित्तल हैं| बड़ा बेटा रावत पाड़ा की दूकान चलाता है और दोनों बेटे दिली गेट की दुकान पर बैठते हैं|ओम प्रकाश की बायपास सर्जरी हुई है इस कारण वो दूकान पर बैठने में सक्षम नही थे और इसी का फायदा उठा कर दोनों छोटे बेटो ने दूकान कब्जा कर ली और मकान से भी निकाल रहे हैं| पंचायत में समझौता होने के बाद भी उन्होंने गुजारा भत्ता के छह हजार माह नही दिए| 25 मार्च को उन्होंने अपने सालो गौरब सौरभ और उनके साथ अथियार बंद साथियो को बुलाया और धमकाया था | उसके बाद सात अप्रैल को बेटो ने खर्चा मांगने पर मारा पीटा और भगा दिया | जान बचा कर मैं यहाँ भाग आया उसके बाद एक दिन बेटे आये और घर चलने को कहा पर हमने फैसला होने से पहले जाने से मना कर दिया|

क्या कहते है बेटे  
वहीं इस सम्बन्ध में दोनों छोटे बेटो मनोज और सुबोध ने लिख कर अपना पक्ष दिया है की बड़े भाई को अच्छी दूकान दे दी गयी पर अभी भी वो कोठी पर नजर लगाये हैं ,हम लोग जैसे तैसे गुजर बसर कर रहे हैं| पेट काट कर माँ बाप को छह हजार खर्च भी दे रहे थे पर पिता जी बड़े भाई की बातों में आके खुद किये गये समझौते पर भी कायम नही रह रहे हैं| हमने कोई मारपीट नही की है|

आश्रम अध्यक्ष ने ली ज़िम्मेदारी 
इस समबन्ध में आश्रम के अध्यक्ष शिव प्रसाद शर्मा का कहना है की इन बूढ़े व्यक्तिओं को कुछ लोग सात अप्रैल को लाये थे इनके परिवार से बात चीत कर वापसी की कोशिश की जा रही है|जब तक यह अपनी मर्जी से नही जाते तब तक इनकी पूरी जिम्मेदारी आश्रम की है|

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