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जानिए कैसे हुए ताजनगरी के दलित व गरीब बच्चो के पढ़ने के सपने चकनाचूर

आगरा : जुलाई आते ही दलित व गरीब बच्चो के चेहरे पर भी मुस्कान लाने के लिए नि:शुल्क एंव अनिवार्य बाल शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009 के अंतर्गत शुरू की गयी सरकार की अनूठी योजना से हजारो बच्चे लाभांवित होते है| जिससे बच्चो के माता-पिता शहर के महंगे कान्वेंट स्कूल मे पढ़ाने का सपना देखते है उस सपने को सच किया बाल शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009 ने जहां दलित व गरीब बच्चे महंगे कान्वेंट स्कूलो मे शिक्षा प्राप्त कर रहे है| वही आगरा मे कुछ अलग ही हो रहा है बेसिक शिक्षा विभाग की लापरवाही से हजारो बच्चो के भविष्य से लगातार खिलवाड़ हो रहा है और आए दिन कुछ न कुछ गड़बड़ी सामने आ रही है| ताज़ा मामले मे देखने को मिला की लड़कियो को लड़को के स्कूल मे एलोटमेंट किया गया है अब सोचने वाली बात है लड़को के स्कूल मे लड़कियो का दाखिला कैसे हो...? यही नहीं शिक्षा विभाग ने शिक्षा के अधिकार अधिनियम के नियम को ताक पर रख कर एक किलोमीटर के दायरे से बाहर जा कर उससे अधिक दूरी के स्कूल एलोट कर दिये| 

ऑनलाइन प्रक्रिया मे स्कूल चॉइस(सेलेक्ट) जो किए गए उनमे से न आवंटित करके अपनी तरफ से अन्य स्कूलो को एलोट(आवंटित) करके भी एक नयी समस्या को जन्म दिया गया| जिसमे बच्चो को अपनी पसंद के स्कूल मे पढ़ने का सपना तो टूटा साथ ही सरकारी प्रक्रिया संदिध नज़र आने लगी| इस वजह से कुछ स्कूलो को एक भी बच्चा एलोट नहीं हुआ तो वही नियम के विरुद्ध जा कर 25 प्रतिशत से ज्यादा बच्चे होली पब्लिक स्कूल आवास विकास शाखा को एलोट किए गए है|  

जानिए क्या कहना है अप्सा के अध्यक्ष संजय तोमर का
नि:शुल्क शिक्षा के लालच मे सरकारी स्कूलो को छोड़ कर कान्वेंट मे आ रहे है वही सरकारी स्कूल खाली हो रहे है| यही वजह है कि 25 प्रतिशत से अधिक बच्चे होली पब्लिक स्कूल आवास विकास सैक्टर-4 को आवंटित कर दिये गए| 

अप्सा के सचिव सुशील चन्द्र गुप्ता 
शिक्षा के अधिकार के तहत एक किलोमीटर से ज्यादा दूरी पर अगर बच्चे को स्कूल एलोट होता है तो गलत है और स्कूल संचालक को अधिकार है वो उसका एडमिशन लेने से इंकार कर दे| 

आर०टी०ई एक्टिविस्ट धनवान गुप्ता क्या कहते है
शिक्षा के अधिकार का इससे बड़ा अपमान नहीं हो सकता है| दलित व गरीब बच्चो के भविष्य से लगातार खिलवाड़ हो रहा है | 

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