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'यूपी के लड़कों' की टूटेगी दोस्ती? अकेले ही 2019 की तैयारी में जुटी सपा



समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव ने लोकसभा चुनाव के लिए सियासी बिसात बिछाना शुरू कर दिया है. इस कड़ी में सपा ने आज लखनऊ के पार्टी कार्यालय में अहम बैठक बुलाई है. प्रदेश की सभी 403 विधानसभा सीटों से पार्टी नेताओं को इस बैठक में बुलाया गया है. विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के लिए छोड़ी गई सीटों से भी पार्टी नेताओं को बैठक में बुलाया गया है. इसका मतलब साफ है कि सपा फिलहाल सूबे की सभी 80 लोकसभा सीटों पर चुनावी तैयारी में जुट गई है.

सपा की इस बैठक में प्रदेश भर के पार्टी जिला अध्यक्ष और विधानसभा चुनाव में जीते हुई विधायक और हारे हुई प्रत्याशी बुलाए गए हैं. इसके अलावा जो सीटें गठबंधन की वजह से कांग्रेस के लिए छोड़ दी गई थीं, वहां से घोषित  उम्मीदवार भी इस बैठक में आमंत्रित हैं. इस बैठक में करीब 1000 पार्टी नेताओं के शामिल होने की संभावना है.
क्या सपा-कांग्रेस की दोस्ती टूट जाएगी?

सपा की इस बैठक को 2019 के लोकसभा चुनाव की एक्सरसाइज के तौर पर देखा जा रहा है. सपा अपने नेताओं और पार्टी कार्यकर्ताओं से क्षेत्र के सियासी माहौल को समझने और उसके बाद रणनीति बनाने की कवायद में है. सवाल ये है कि सपा का कांग्रेस के लिए छोड़ी गई सीटों से नेताओं को इस बैठक में बुलाना कहीं यूपी के लड़कों की दोस्ती जुदाई की राह पर होने का इशारा तो नहीं है?

जनता ने यूपी के लड़कों की दोस्ती को नहीं कुबूल किया

बता दें कि उत्तर प्रदेश का 2017 का विधानसभा चुनाव सपा और कांग्रेस से मिलकर लड़ा था. अखिलेश यादव और राहुल गांधी की जोड़ी को यूपी के लड़के का नाम दिया गया था, लेकिन जनता से इस दोस्ती को कुबूल नहीं किया. विधानसभा चुनाव में सपा और कांग्रेस दोनों को करारी हार का सामना करना पड़ा. इसके बाद सपा के संरक्षक मुलायम सिंह यादव और शिवपाल यादव ने पार्टी की हार के लिए कांग्रेस से दोस्ती को जिम्मेदार ठहराया था.

सपा के EVM बैठक पर कांग्रेस नहीं हुई शामिल

अखिलेश हालांकि अब तक किसी की परवाह किए बिना राहुल से दोस्ती का राग जप रहे थे. वो 2019 के लोकसभा चुनाव में एक बड़े गठबंधन के साथ उतरने की बात खुले दिल से कहते रहे हैं. हाल ही में सपा द्वारा EVM को लेकर बैठक बुलाई थी, जिसमें पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने सभी राजनीतिक दलों को दावतनामा भेजा था. सपा की इस EVM की बैठक में कांग्रेस ने बड़ा झटका दिया और वो शामिल नहीं हुई. इस बैठक में सूबे को छोटे छोटे राजनीतिक दल ही शामिल हुए थे.

कांग्रेस ने अखिलेश को इस बैठक के लिए महज नैतिक समर्थन का एक पत्र भेज दिया. सपा की इस बैठक में कांग्रेस का शामिल न होना अखिलेश के लिए बड़ा झटका था.

उपचुनाव में साझा उम्मीदवार उतारने को लगा बड़ा झटका

अखिलेश यादव की EVM बैठक को फूलपुर और गोरखपुर में साझा उम्मीदवार उतारने के एक लिटमस टेस्ट के तौर पर भी देखा जा रहा था. क्योंकि शुरू से ही इन दोनों सीटों पर साझा उम्मीदवार उतारे जाने की बात उठती रही है. लेकिन इस में कांग्रेस और बसपा जैसे दल शामिल नहीं हुए, जिससे ये बैठक फीकी रही. इससे साझा उम्मीदवार के उतारे जाने को भी बड़ा झटका लगा है.

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