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तीन साल में साइबर अपराध बढ़ाए आइये जानते हैं कि साइबर अपराध है क्या ?



नयी दिल्ली : साइबर अपराध से जुड़े मामलों में पिछले तीन सालों में लगातार इजाफा दर्ज किया जा रहा है। राज्यसभा में आज प्रश्नकाल के दौरान सरकार की ओर से पेश आंकड़ों के मुताबिक साल 2014 में यह संख्या 9622 थी, जो कि साल 2015 में बढ़कर 11592 और साल 2016 में 12317 हो गयी। कांग्रेस सदस्य टी सुब्बारामी रेड्डी द्वारा बैंक कार्ड और ई वॉलेट से लेनदेन में धोखाधड़ी सहित अन्य साइबर अपराधों में इजाफे पर उठाये गये सवाल के जवाब में इलेक्ट्रॉनिक एवं सूचना प्रोद्यौगिकी मंत्री रवि शंकर प्रसाद ने कहा कि सरकार इस चुनौती के प्रति सचेत है।

सरकार इंटरपोल और सीबीआई के साथ इस दिशा में काम कर रही है। इसके अलावा बाल पोर्नोग्राफी से जुड़ी वेबसाइटों की भी पहचान कर इन पर रोक लगाने की कार्रवाई की जा रही है। उन्होंने राष्ट्रीय अपराध रिकार्ड ब्यूरो के आंकड़ों के हवाले से बताया कि इंडियन कम्प्यूटर इमरजेंसी रिपोर्ट टीम ने क्रेडिट कार्ड एवं अन्य ऑनलाइन लेनदेन के तरीकों से जुड़ी निजी जानकारियों की सेंधमारी संबंधी 79 मामले दर्ज किये हैं।
इन वारदातों के कारण 22 वित्तीय संस्थान, 13 एटीएम और ऑनलाइन भुगतान के अन्य केन्द्र प्रभावित हुये हैं। इस बीच रिजर्व बैंक ने क्रेडिट कार्ड संबंधी धोखाधड़ी के साल 2014-15 में 13083, साल 2015-16 में 16468 और साल 2016-17 में अप्रैल से सितंबर तक की तिमाही के दौरान 13653 मामले दर्ज किये हैं। प्रसाद ने कहा कि इस समस्या से निपटने के लिये सरकार ने विभिन्न राज्यों में ऑनलाइन धोखाधड़ी की जांच संबंधी प्रयोगशालायें स्थापित कर इनके प्रभावी संचालन के लिये सैकड़ों अधिकारियों की तैनाती की है। उन्होंने बताया कि ऑनलाइन लेनदेन से जुड़े सरकार के ‘भीम एप’ से जुड़ा धोखाधड़ी का अब तक कोई मामला सामने आने की कोई रिपोर्ट नहीं है, हालांकि सरकार इस दिशा में सचेत है।

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