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आगरा महोत्सव : खून नहीं खौलगा, पढ़ सुन कर अखबारों में...


आगरा: गुलाबी सर्द रात में कोठी मीना बाजार वीर रस की कविताओं से गूंजा, तो माहौल में साहस और वीरता का जोश भर गया। काव्य की हर पंक्ति पर श्रोता वाह-वाह करते नजर आए। मौका था बुधवार को आगरा महोत्सव में हुए सरदार बल्लभ भाई पटेल जयंती पर हुए अखिल भारतीय कवि सम्मेलन का, जिसमें कवियों ने अपने ही अंदाज में विभिन्न मुद्दों को छुआ। मथुरा की कवियत्री पूनम वर्मा ने नारी चेतना पर अपनी कविता प्रस्तुत की। मीरा सी दीवान हम, रांङो की हीरानी हम,तेवर से आग लगा दें, सागर के पानी में हम। इस कविता के बाद उन्होंने नारी शक्ति को दर्शाती अपनी कविताओं से श्रोताओं का बांध लिया। 

दिल्ली के डॉ. प्रवीण शुक्ल हास्य के अंदाज में देश के वर्तमान हालातों को जताने की कोशिश की कि मैंने जिन्न से कहा भारत से भ्रष्टाचार भगा दो, जिन्न बोला, मैं बोतल में घुस रहा हूं, तुम ऊपर से ढक्कन लगा दो। शहर के डॉ. सोम ठाकुर ने सागर चरण पखारे, गंगा शीश चढ़ावे वीर, मेरे भारत की मारी है, चंदन और अबीर। हास्य रस के महारथी जबलपुर के सुदीप भोला ने स्टैच्यू ऑफ यूनिटी पर अपनी कविता पेश की कि इरादे लौह थे सरदार बल्लभ भाई के, तब ही कई तारीख जोड़ी और भारत वर्ष रचकर डाला। इस पर वहां मौजूद श्रोताओं ने उनका पूरा साथ दिया। 

डॉ. हरिओम पवार के माइक थामते ही पूरा सम्मेलन परिसर तालियों से गूंज उठा। उन्होंने अपने चिर-परिचित अंदाज में प्रस्तुति दी और सेना के सम्मान को याद किया कि किसका खून नहीं खौलगा, पढ़ सुन कर अखबारों में, शेरों की पेशी करवा दी, चूहों के दरबारों में। कवि सम्मेलन का संचालन और संयोजन वीर रस के कवि विनीत चौहान ने किया। उन्होंने भी अपनी कविता से सेना के जवानों की शान में कसीदे गढ़े कि गर 47 में सेना के थोड़े से कदम बढ़ा देते, 1इस पाक नाम की चिड़िया को धरती से तभी मिटा देते। उद्घाटन एससी आयोग अध्यक्ष प्रो. रामशंकर कठेरिया, मेयर नवीन जैन, मेला संयोजक राकेश गर्ग, जितेंद्र गुप्ता, डीवीवीएनएल एमडी राकेश कुमार, अनूप वर्मा, अनिल चौधरी, उमेश गर्ग, शगुन बंसल, विजय सामा, मुनेंद्र सिंह, राम शर्मा, रिया शाह, अमित सूरी, कमलप्रीत सिंह आदि ने किया।

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