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क्यों मनाया जाता है ईद-उल-अजहा.... जाने

नवनीत मिश्र, संत कबीर नगर 


संत कबीर नगर : ईद-उल-जुहा या ईद-उल-अजहा या बकरीद का त्योहार सोमवार को धूमधाम से मनाया जा रहा है। ईदगाह और मस्जिदों में अकीदत के साथ ईद की नमाज अदा की गई। ईद-उल-अजहा मुस्लिम समुदाय का बेहद खास पर्व है। ईद-उल-अजहा हजरत इब्राहिम के अल्लाह के प्रति अपने बेटे स्माइल की कुर्बानी की याद में मनाया जाता है।

ईद-उल-अजहा मनाने का करण 
इस्लामिक मामलों के जानकार मोo सईद खान के अनुसार हजरत इब्राहिम का इम्तहान लेने के लिए अल्लाह ने उनसे अपनी सबसे अजीज चीज की कुर्बानी देने का हुक्म दिया था। हजरत इब्राहिम को उनका बेटा बेहद अजीज था, इसलिए उन्होंने बेटे की कुर्बानी देना स्वीकार किया।

कुर्बानी देते हुए हजरत इब्राहिम अपनी आंखों पर काली पट्टी बांध ली थी, जिससे कि उनकी भावनाएं सामने न आ सकें। कुर्बानी के बाद जब उन्होंने पट्टी हटाई तो अपने पुत्र को जिंदा पाया और सामने कटा हुआ दुम्बा (भेड़ जैसा जानवर) पड़ा हुआ था, तभी से इस मौके पर कुर्बानी देने की प्रथा है।

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