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हैरान हो जायेंगे आप भी इस महान संगीतकार की उपलब्धियाँ जानकर

रोशन मिश्रा, चंदौसी


मुंबई : संगीत सुकून है और भारतीय हिन्दी फिल्मों में संगीत का अपना अलग पहचान है। इसी  फिल्मी दुनिया में 40-50 के दशक में एक युवा ने दस्तक दिया था जिसका वास्तविक नाम मो. जहुर ख़य्याम हाशमी था जो आगे चलकर महान संगीतकार 'ख़य्याम 'नाम से मशहूर हुए। ख़य्याम साहब ने  करीब 65 वर्षो तक फिल्म संगीत में अपना योगदान दिया। 19 अगस्त 2019 को मुंबई के एक निजी अस्पताल में वे इस दुनिया से रुख़सत हो गए। वो एक ऐसे शख्स थे जिन्होंने अपने नए अंदाज़, नये धुन तथा मनभावन संगीत के बल पर मात्र चुनिन्दा फिल्मों में संगीत देने के बावजूद भी सबके चहेते बन गये थे। 

ख़य्याम साहब का जन्म 18फरवरी 1927 अविभाजित भारत के पंजाब प्रांत में हुआ था। फिल्मों के प्रति बचपन से लगाव था, वो हीरो बनना चाहते थे। संगीत के प्रति निष्ठावान होने के कारण वो अपने चाचा के पास संगीत सीखने के लिए दिल्ली भाग गए जहाँ पं. अमरनाथ जी के पास संगीत की शिक्षा लेने लगे। शायद बहुत कम लोगों को पता है कि शुरुआत में हीरो बनने के लिए वो लाहौर गए थे जहाँ संगीत निर्देशक बाबा चिश्ती के सहायक के रूप में बिना मेहनताना उन्होनें काम किया। साजों से प्यार करने वाले ख़य्याम साहब द्वितीय विश्वयुद्ध के दौरान सेना में शामिल हों गए थे। ख़य्याम साहब के बारे में सबसे रोचक तथ्य यह है कि उनके कैरियर की शुरुआत ना ही बतौर हीरो और ना ही बतौर संगीतकार के रूप में हुई। सन् 1947 में फिल्म रोमियो एंड जूलियट के लिए  उन्होनें पहली बार अपने कैरियर की शुरुआत बतौर गायक के रूप में किया था। 1948 में उन्हें पहला ब्रेक फिल्म हीर-रांझा में बतौर संगीत निर्देशक के रूप में मिला। सन् 1950 में उन्होनें  पहली बार सोलो संगीतकार के रूप में फिल्म 'बीबी ' में संगीत दिया। 

बेहतरीन संगीत के लिए उन्हें 1977 में फिल्म 'कभी-कभी' तथा 1982मे फिल्म  'उमराव जान ' के लिए फिल्म फेयर का अवार्ड मिला था। फिल्म 'उमराव जान' के लिए उन्हें नेशनल अवार्ड भी मिला था। साल 2007 में उन्हें संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार तथा साल 2011 में पदम् भूषण सम्मान भी मिला। ख़य्याम साहब ने साल 2016 में फिल्म ' गुलाम -बंधु ' में आखिरी बार संगीत दिया था। उनके द्वारा गये संगीत वाले कुछ फिल्मों के नाम- फुटपाथ, कभी -कभी, बाजार, रजिया सुल्तान, उमराव जान, त्रिशूल, खानदान, शोला और शबनम, आखिरी खत, फिर सुबह होगी, नूरी, थोड़ी सी बेवफ़ाई और आहिस्ता-आहिस्ता है।


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