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इस सरकारी विभाग में नौकरियों के अवसर, जानें कैसे करें आवेदन

अशरफ शेख़, कानपुर


ग्रामीण हेल्थ केयर वर्कर एक मध्य स्तरीय स्वास्थ्य कर्मचारी होते हैं, जो सामान स्वास्थ्य समस्याओं का निदान और इलाज करने के लिए प्रशिक्षित किए जाते हैं। जिससे किसी भी आपातकालीन स्थिति में प्रारंभिक प्रबंधन यानी शुरुआती इलाज उपलब्ध करा सकें और आगे के इलाज के लिए गंभीर रूप से बीमार या घायल मरीजों को अस्पतालों तक पहुंचाया जा सके। ग्रामीण हेल्थ केयर वर्कर की प्राथमिक जिम्मेदारियों में मामूली बीमारियों का इलाज, बुजुर्ग लोगों की देखभाल, गर्भवती महिलाओं और बच्चों की देखभाल शामिल होते हैं। इसके आलावा वह परिवार नियोजन सेवाओं, स्वच्छता के लिए जागरूकता फैलाना और स्वच्छता को बढ़ावा देना, संचारी रोगों के लिए स्क्रीनिंग, स्वास्थ्य शिक्षा गतिविधियों का प्रदर्शन, आंकड़े इकट्ठा करना, रिकॉर्ड बनाए रखना और स्वास्थ्य ज्यादा खराब होने पर क्षेत्रीय लोगों को अस्पतालों तक पहुंचवाना भी इनका काम होता है।

वे ग्रामीण समुदाय के सदस्यों के साथ काम में हाथ बंटाते हैं और मेडिकल प्रोफेशनल्स व शिक्षकों के लिए डेटा एकत्र करने से लेकर सार्वजनिक स्वास्थ्य कार्यक्रमों को सफलतापूर्वक पूरा करने में भी मदद करते हैं। ग्रामीण हेल्थ केयर वर्कर ग्रामीण समुदाय के साथ मिलकर गावों में स्वास्थ्य और स्वच्छता जागरूकता पर चर्चाएं करते हैं अथवा उन्हें आपातकालीन स्थिति से निपटने के लिए ट्रेनिंग देते हैं और डेंगू, मलेरिया जैसे रोगों से बचने के भी उपाय बताते हैं। 

कैसे बने हेल्थ केयर वर्कर
इस फील्ड में करियर बनाने के लिए अभ्यर्थी को किसी भी संकाय से व मान्यता प्राप्त बोर्ड से 12वीं पास होना जरुरी है। कोर्स के बारे में रूरल हेल्थ केयर में 1-2 वर्ष का डिप्लोमा लेकर इस फील्ड में एक्सपर्ट बन सकते हैं और इस फील्ड से जुड़े हर एक कार्य को प्रैक्टिक्ली जान और समझ सकते हैं। कोर्स के दौरान उन्हें ग्रामीण इलाकों में आपातकालीन स्थिति या किसी भी तरह की आपदा की स्थिति में किस तरह समुचित मेडिकल सुविधाओं का प्रबंध कराया जाए यह सिखाते हैं, उनकी तीमारदारी और सेवा कैसे की जाती है उसकी सीख दी जाती है। किन अलग-अलग माध्यमों का इस्तेमाल कर के जागरूकता के संदेश लोगों तक पहुंचाया जाए वह बताते हैं। साथ ही किसी परेशानी के समय गर्भवती महिलाओं और बच्चों की देखभाल कैसे की जाए इसकी भी ट्रेनिंग न भलीभांति दी जाती है। फूड क्राफ्ट, फूड प्रोडक्शन, फूड एंड बेवरेजेज सर्विस या बेरी कंफेक्शनरी में डिग्री, डिप्लोमा या सर्टिफिकेट हासिल करने के बाद रोजगार के कई रास्ते खुल जाते हैं |

कहां-कहां हैं अवसर 
डिप्लोमा इन रूरल हेल्थ केयर कोर्स करने के बाद बतौर कर्मचारी स्वास्थ्य विभाग, परिवार नियोजन मंत्रालय, पर्यावरण विभाग के अलावा सरकारी व गैर सरकारी एनजीओ में तो नौकरी कर सकते हैं बल्कि प्राइवेट आर्गेनाइजेशन की सीएसआर डिपार्टमेंट में भी नौकरी के विकल्प मौजूद होते हैं।

सैलरी  
डिप्लोमा इन रूरल हेल्थ केयर का कोर्स करने के बाद आप बतौर कर्मचारी अपने करियर की शुरुआत कर सकते हैं। इन्हें शुरुआती वेतन के तौर पर 10 हजार से लेकर 15 हजार तक मिल सकता है। लेकिन तजुर्बे के आधार पर परमोशन इस पाकर आप सुपरवाइजर व डेवलपमेंट ऑफिसर भी बन सकते हैं और वेतन में भी इजाफा होता है। और इसके आलावा ग्रामीण इलाकों में खुद का क्लीनिक शुरू कर या किसी प्राइवेट क्लिनिक में भी उचित वेतन पर काम कर अपना करियर संवार सकते हैं।

प्रमुख संस्थान :

दिल्ली पैरामेडिकल एंड मैनेजमेंट इंस्टीट्यूट, नई दिल्ली 
www.dpmiindia.com 

क्रैडल इंस्टिट्यूट ऑफ पैरामेडिकल साइंसेज 
www.cmi-hm.com 

- महर्षि मर्केडेश्वर यूनिवर्सिटी, अम्बाला, हरियाणा 
www.mmumullana.org 

इंडियन मेडिकल इंस्टीट्यूट ऑफ नर्सिंग, जालंधर, पंजाब 
www.iminursing.in 

इंस्टीट्यूट ऑफ एलाइड हेल्थ साइंसेज, कोलकाता 
www.iahs.co.in




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