Display bannar

सुर्खियां

जानिए... गणेश चतुर्थी का शुभ मुहूर्त और पूजा विधि

राम बाबू शर्मा, जयपुर 


गणेश चतुर्थी हिंदूओं के प्रमुख त्योहारों में से एक है क्योंकि हम लोगो कोई भी कार्य हो चाहे जन्म हो चाहे मरण हम लोग हर काम से पहले गणेश भगवान की पूजा करते हें क्योंकि इनको रिद्धी सिद्धी के देवता माना जाता हैं और गणेश चतुर्थी भगवान गणेश के जन्म के उपल्क्ष में मनाई जाती है । इस त्योहार को वैसे तो पूरे देश में ही मनाया जाता है लेकिन फिर भी महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश में इस त्योहार को अलग ही ढंग से मनाया जाता है । यहां पर ये त्योहार करीब 10 दिनों तक मनाया जाता है और उसके बाद गणेश जी भगवान को विदा कर दिया जाता है । आपको बता दें कि ये त्योहार गणेश चतुर्थी को शुरू होता है और अनंत चतुर्दशी को समाप्त हो जाता है।

गणेश चतुर्थी कब मनाई जाती है ?
हिन्‍दू पंचांग के अनुसार भादो माह की शुक्‍ल पक्ष चतुर्थी को भगवान गणेश का जन्‍म हुआ था और उसी के उपल्क्ष में गणेश चतुर्थी मनाई जाती है । 

गणेश चतुर्थी की तिथ‍ि और स्‍थापना का शुभ मुहूर्त
गणेश चतुर्थी तिथि प्रारंभ: 02 सितंबर 2019 को सुबह 4 बजकर 57 मिनट से.
गणेश चतुर्थी तिथि समाप्त: 03 सितंबर 2019 की रात  01 बजकर 54 मिनट तक.
गणपति की स्‍थापना और पूजा का समय: 02 सितंबर की सुबह 11 बजकर 05 मिनट से दोपहर 01 बजकर 36 मिनट तक शुभ मुहूर्त है । 


कैसे करें गणपति की स्‍थापना?
गणपति की स्‍थापना गणेश चतुर्थी के दिन मध्‍याह्न में की जाती है. मान्‍यता है कि गणपति का जन्‍म मध्‍याह्न काल में हुआ था इसके साथ ही आपको बता दें कि इस दिन चंद्रमा के दर्शन नहीं करने चाहिए । 

आप चाहे तो बाजार से खरीदकर या अपने हाथ से बनी गणपति बप्‍पा की मूर्ति स्‍थापित कर सकते हैं. । स्थापना से पहले स्‍नान करें और बाद में नए या साफ धुले हुए बिना कटे-फटे वस्‍त्र पहनने चाहिए । इसके बाद अपने माथे पर तिलक लगाएं और पूर्व दिशा की ओर मुख कर आसन पर बैठ जाएं. जिस आसन पर आप बैठने वाले है वो भी कटा-फटा नहीं होना चाहिए । इसके बाद गणेश जी की प्रतिमा को किसी लकड़ी के पट्टे या फिर गेहूं, मूंग, ज्‍वार के ऊपर लाल वस्‍त्र बिछाकर स्‍थापित करें । गणपति की प्रतिमा के दाएं-बाएं रिद्धि-सिद्धि के प्रतीक स्‍वरूप एक-एक सुपारी रखें । 

गणपति की स्‍थापना के बाद इस तरह पूजन करें 
पूजा के लिए आप सबसे पहले घी का दीपक जलाएं. इसके बाद पूजा का संकल्‍प लें । फिर गणेश जी का ध्‍यान करने के बाद उनका आह्वन करें । उसके बाद गणेश जी भगवान को स्‍नान कराएं । सबसे पहले जल से, फिर दूध, दही, घी, शहद और चीनी के मिश्रण आदि से और अंत में पुन: शुद्ध जल से स्‍नान कराएं । अब गणेश जी को वस्‍त्र चढ़ाएं । यदि आपके पास कपडे नहीं है तो आप उनको एक मोली भी अर्पित कर सकते हैं ।  इसके बाद गणपति की प्रतिमा पर सिंदूर, चंदन, फूल और फूलों की माला अर्पित करें । अब उसके बाद बप्‍पा को मनमोहक सुगंध वाली धूप दिखाएं. । अब एक दूसरा दीपक जलाकर गणपति की प्रतिमा को दिखाकर हाथ धो लें. हाथ पोंछने के लिए नए कपड़े का उपयोग करें । इसके बाद नैवेद्य चढ़ाएं. नैवेद्य में मोदक, मिठाई, गुड़ और फल आदि चीजों को शामिल करें । जिसके बाद गणपति को नारियल और दक्षिणा प्रदान करें ।  अब अपने परिवार के साथ गणपति की आरती करें । इसके आद अंत में कुछ फूल लेकर उनके चरणों में पुष्पाजंलि अर्तित करें । अब गणपति की परिक्रमा करें । इसके साथ ही आपको बता दें कि गणपति की परिक्रमा एक बार ही की जाती है ।




No comments