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एंडोमेट्रियोसिस वाली महिलाओं में प्रेग्नेंसी रेट को बढ़ाती है मिनिमली इनवेसिव एंडोस्कोपिक प्रक्रिया


आगराः एंडोमेट्रियोसिस के कारण महिलाओं में इनफर्टिलिटी के बढ़ते मामलों और इससे संबंधित उपलब्ध एडवांस इलाज के बारे में जागरुकता बढ़ाने के लिए साकेत स्थित मैक्स हॉस्पिटल ने आज एक जागरुकता आभियान का आयोजन किया। एंडोमेट्रियोसिस के कारण इनफर्टिलिटी वाली महिलाओं के निदान और इलाज के लिए आज एडवांस मिनिमली इनवेसिव प्रक्रियाएं उपलब्ध हैं। जो महिलाएं आईवीएफ के जरिए गर्भधारण करना चाहती हैं, ये प्रक्रियाएं ऐसी महिलाओं में ट्रीटमेंट को सफल बनाती हैं। एंडोमेट्रियोसिस, महिलाओं में इनफर्टिलिटी का एक आम कारण है और फर्टिलिटी ट्रीटमेंट लेने वाली लगभग 30-40ः महिलाएं इस समस्या से पीड़ित होती हैं। फैलोपियन ट्यूब और ओवरीज पेल्विस की लाइनिंग के पास हो सकते हैं, जिससे दोनों के मूवमेंट में रुकावट आती है| डोमेट्रियोसिस की समस्या बताती है कि ओवरीज और फैलोपियन ट्यूब सही जगह पर नहीं हैं, जिसके कारण अंडे फैलोपियन ट्यूब में प्रवेश नहीं कर पाते हैं। साथ ही, एंडोमेट्रियोसिस फैलोपियन ट्यूब की अंदरूनी परत को डैमेज या ब्लॉक कर सकती है, जिसके कारण अंडे फैलोपियन ट्यूब से होकर गर्भाशय तक नहीं पहुंच पाते हैं। 

नई दिल्ली में साकेत स्थित मैक्स हॉस्पिटल में ऑब्सटेट्रिक्स और गायनोकोलॉजी विभाग की निदेशक व हेड, डॉक्टर सोनिया नाइक ने बताया कि, “इस समस्या का मेडिकल या सर्जिकल इलाज समस्या की स्टेज और गंभीरता पर निर्भर करता है। शुरुआती स्टेज में मेडिकेशन की मदद से समस्या से छुटकारा पाया जा सकता है लेकिन फायदा न मिलने पर सर्जिकल तरीके से इलाज किया जाता है। एडवांस मिनिमली इनवेसिव लेप्रोस्कोपिक प्रक्रिया पेल्विस के आकार को सही करके एंडोमेट्रियोसिस के ब्लॉकेज को हटाने का सबसे बेहतरीन तरीका है।” एंडोमेट्रियोसिस के लक्षण एक मरीज से दूसरे मरीज में अलग-अलग हो सकते हैं। इसके आम लक्षण पेल्विक में दर्द और इनफर्टिलिटी हैं। पेल्विक का दर्द पीरियड्स से पहले, उसके दौरान या उसके बाद हो सकता है। कुछ महिलाएं इस दर्द का अनुभव सेक्स या मल-मूत्र के दौरान करती हैं। महिलाओं को मल-मूत्र के दौरान ब्लीडिंग भी हो सकती है।

डॉक्टर सोनिया नाइक ने आगे बताया कि, “कंसीव करने के लिए एक हेल्दी और नॉर्मल आकार वाली कैविटी की आवश्कता होती है, इसलिए इस समस्या से निजात पाने में हिस्टेरोस्कोपी एक अहम भूमिका निभाती है। इस प्रक्रिया में गर्भाशय के अंदर जांच करके समस्या का निदान किया जाता है, जिससे समस्या का इलाज हो सके। यदि हिस्टेरोस्कोपी के दौरान समस्या का निदान होता है तो ऑपरेटिव हिस्टेरोस्कोपी की मदद से उसी वक्त समस्या का इलाज किया जाता है, ताकि दूसरी सर्जरी की जरूरत न पड़े।” इन विट्रो फर्टिलाइजेशन (आईवीएफ) प्रक्रिया एंडोमेट्रियोसिस वाली महिलाओं में प्रजनन क्षमता को बेहतर करती है। यदि सभी नियमों का पालन किया जाए तो आईवीएफ प्रक्रिया की मदद से प्रग्नेंसी रेट 50-60 तक बढ़ सकता है।


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